मनोवैज्ञानिक और संज्ञानात्मक प्रभाव ऑनलाइन शिक्षण पद्धति बनाम पारंपरिक शिक्षण पद्धति के बीच तुलना
DOI: https://doi.org/10.56815/IRJAHS.v(2026)i2.20-25
Keywords:
मुख्य शब्द: ऑनलाइन शिक्षण, परंपरागत शिक्षण, लचीली शिक्षण प्रक्रिया, शिक्षण में प्रभावशीलता।Abstract
सारांश : ऑनलाइन शिक्षण विधि एक ऐसी शिक्षण विधि है जो शिक्षा को प्रभावशाली बनाने में मदद करती है। इसके अंतर्गत कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, मोबाइल ऐप आदि आते हैं। इसके अलावा परंपरागत शिक्षण विधि वह शिक्षा प्रणाली है जिसमें शिक्षक एवं छात्र आमने-सामने बैठकर शिक्षण प्रक्रिया करते हैं, जिसमें शिक्षक पुस्तकों एवं ब्लैक बोर्ड-चॉक की सहायता से शिक्षण बिंदु को व्याख्यान विधि की सहायता से छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करता है। ऑनलाइन शिक्षण विधि व्यक्तिगत रूप से अनुकूल है क्योंकि यह छात्रों को उनकी व्यक्तिगत क्षमता, योग्यता, रुचि, समझ आदि के आधार पर शिक्षा प्रदान करती है, जबकि परंपरागत शिक्षण विधि सभी छात्रों को एक समान शिक्षा प्रदान करती है, चाहे वह उच्च बुद्धि लब्धि के हों या निम्न बुद्धि लब्धि के। परंपरागत शिक्षण विधि में छात्रों की रुचि, योग्यता एवं क्षमता को विशेष महत्व नहीं दिया जाता। ऑनलाइन शिक्षण विधि का प्रयोग छात्रों द्वारा आसानी से किसी भी समय, किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। अतः यह लचीली शिक्षण विधि है, जबकि पारंपरिक शिक्षण विधि की प्रकृति कठोर है क्योंकि इसका छात्रों द्वारा किसी निश्चित समय एवं स्थान पर ही प्रयोग किया जा सकता है। प्रभावशीलता की दृष्टि से ऑनलाइन शिक्षण विधि पारंपरिक शिक्षण विधि से अधिक प्रभावशील है। ऑनलाइन शिक्षण विधि की सहायता से छात्र कठिन से कठिन शिक्षण बिंदु को इंटरनेट, वेब ब्राउजर एवं ऐप आदि के माध्यम से अपनी योग्यता एवं शिक्षक गति के अनुसार पढ़ सकते हैं। इसमें छात्र ऑडियो, वीडियो, नवीन शिक्षण पद्धतियों आदि के माध्यम से अध्ययन करके अपनी समस्याओं का हल स्वयं कर सकते हैं। इसके विपरीत, परंपरागत शिक्षण विधि में किसी भी शिक्षण बिंदु की प्रभावशीलता केवल शिक्षक की योग्यता, अनुभव एवं क्षमता पर निर्भर करती है। लागत एवं संसाधन की दृष्टि से ऑनलाइन शिक्षण विधि अधिक महंगी एवं खर्चीली है, जबकि परंपरागत शिक्षण विधि कम खर्चीली एवं आसानी से उपलब्ध हो जाती है।