छात्रावास और परिवार में रहने वाले विद्यार्थियों की बुद्धि समायोजन एवं दुश्चिंता का अध्ययन

DOI: https://doi.org/10.56815/IRJAHS/2026.V(2026)I1.18-21

Authors

  • सीमा मित्तल शोधार्थी, माधव विश्वविद्यालय, पिंडवाड़ा, राजस्थान, भारत
  • डॉ. अवधेश आर्य डीन शिक्षा संकाय, माधव विश्वविद्यालय, पिंडवाड़ा, राजस्थान, भारत

Keywords:

(मुख्य शब्द) : पारिवारिक एवं छात्रावासीय परिवेश, विद्यार्थी, बुद्धि, समायोजन व दुश्चिंता।

Abstract

घर या परिवार समाज की एक इकाई है। यह सबसे अधिक आधारभूत सामाजिक समूह है जिसमें साधारणत: पति–पत्नी और उनके बच्चे होते हैं। पारिवारिक परिवेश से आशय व्यक्तियों के उस समूह से है, जो विवाह, रक्त या गोद लेने के बंधनों से जुड़े एक गृहस्थी का निर्माण करते हैं। पति–पत्नी, माता–पिता, पुत्र–पुत्री, भाई–बहिन अपने–अपने सामाजिक कार्यों से प्रभाव डालते हैं।
छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की बुद्धि समायोजन का स्तर व दुश्चिंता का स्तर अलग–अलग होता है। परिवार में मूलभूत आवश्यकता नहीं मिलने की वजह से विद्यार्थी छात्रावास की ओर रुख करते हैं। परिवार रहकर और छात्रावास में रहकर विद्यार्थी किस प्रकार से समायोजित व दुश्चिंता को दूर करते हैं इसी जिज्ञासा से प्रस्तुत समस्या को जन्म दिया इसलिए शोधार्थी द्वारा परिवार एवं छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की बुद्धि, समायोजन व दुश्चिंता के स्तर का अध्ययन किया है।

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Published

2026-03-20

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